छोड़ के गाँव जब शहर गया अशांति क्या होती है मै समझ गया

छोड़ के गाँव जब शहर गया अशांति क्या होती है मै समझ गया शांति से मन मेरा ऊब गया तब

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बेरोजगारी बनाम विकास

बेरोजगारी बनाम विकास बात भ्रष्टाचार की सबको सताती है—— बात भ्रष्टाचार की सबको समझ आती है इसे रोकने की बात

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लोकतंत्र में नोट तंत्र

अपने माँ पर जितना अत्याचार करना है बेटा तू कर, पर अब नहीं सहे जा रहे हैं :-   हमारे

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भारत की ज़ुबान है भारत की पहचान है

                        हिंदी                                    हिंदी बिना सिर्फ हम हीं नहीं भारत बिन ज़ुबान है हिंदी सिर्फ हमारी हीं नहीं पूरे भारत की

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हार के आगे जीत है जीत के आगे है हार

                             दोहा                    पहाड़ के आगे नदी है नदी के आगे समुंदर।                                             जिस जिंदगी में दिशा ना हो वह है बेडगर।।

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ये कैसे नेता ?

देश बनाया – नेक बनाया – एक बनाया क्यों बनाया ? दोष किसका है समाज का या समझ का ?

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