आरएसएस में गुरु दक्षिणा के साथ इस बार देना होगा आधार नंबर

गोरखपुर. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) में गुरु पूर्णिमा उत्सव guru poornima utsav पर गुरु दक्षिणा देने की परम्परा 1928 से चली आ रही है लेकिन यह पहला मौका है जब इसके लिए दाता का आईडी, ईमेल और आधार नंबर अनिवार्य कर दिया गया है। 27 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के दिन से शुरू होकर एक महीने तक guru poornima utsav पर संघ की शाखाओं में गुरु दक्षिणा दी जा सकेगी।

-दक्षिणा दाताओं को दर्ज कराना होगा आईडी, ई-मेल और आधार नंबर

-नगद नहीं ली जाएगी बड़ी रकम, चेक या ड्राफ्ट देना होगा

-दावा है कि पारदर्शिता के लिहाज से लागू की जा रही है व्यवस्था

अब तक संघ guru poornima utsav पर गुरु दक्षिणा के आंकड़े नहीं देता था। यह पूरी तरह गोपनीय रखा जाता था। 27 सितम्बर 1925 को संघ की स्थापना के बाद 1928 में पहली बार गुरु दक्षिणा कार्यक्रम हुआ था। बताते हैं कि तब 84.50 रुपए जुटे थे। लेकिन अब संघ का संगठन पूरे देश में फैला हुआ है। लाखों स्वयं सेवक इसमें भाग लेते हैं इसलिए अंदाज लगाया जाता है कि गुरु दक्षिणा में करोड़ों रुपए संघ के कोष में जमा होते हैं। इस कोष का प्रबंधन संघ का व्यवस्था विभाग करता है। कहा जाता है कि संघ और उसकी विभिन्न इकाईयों का वर्ष भर का खर्च इसी गुरु दक्षिणा के धन से वहन किया जाता है।

देश की बदली अर्थव्यवस्था के चलते आया बदलाव

गुरु दक्षिणा देने वालों की आईडी, ई मेल और आधार नंबर दर्ज किए जाने की व्यवस्था देश की बदलती अर्थव्यवस्था के चलते जरूरी मानी गई है। विभाग प्रचारक बैरिस्टर का कहना है कि आज के जमाने में किसी भी आर्थिक लेन-देन का हिसाब रखना जरूरी है। पता होना चाहिए कि कहां से कितना धन आया है। देश के कानून और अर्थनीति के हिसाब से संघ ने भी अपनी व्यवस्था निर्धारित की है। उन्होंने दावा किया कि नई व्यवस्था में भी जानकारियां दाता और व्यवस्था विभाग के लोगों के बीच ही रहेंगी।

बड़ी रकम के लिए चेक/ ड्राफ्ट अनिवार्य

गुरु दक्षिणा में यदि किसी को बड़ी रकम देनी हो तो उसके लिए चेक या ड्राफ्ट अनिवार्य कर दिया गया है। दक्षिणा सीधे आरएसएस के बैंक खाते में दी जा सकेगी।

सोशल मीडिया में नई व्यवस्था की चर्चा

गुरु दक्षिणा को लेकर संघ की नई व्यवस्था की जानकारी कार्यकर्ताओं को दी गई है। इसकी चर्चा सोशल मीडिया में भी हो रही है। प्रज्ञा प्रवाह के पूूूर्वी उत्‍तर प्रदेेेेश के संयोजक कौस्‍तुभ नारायण्‍ा मिश्र ने अपनी फेसबुक वॉल पर लिखा कि ‘हल्के, अगम्भीर और संगठन का केवल उपयोग करने वाले लोग अब सिर्फ अपना नाम दर्ज कराकर सुर्खरू नहीं बन सकेंगे।’

मुख्य अतिथि का नाम भी नहीं छपेगा कार्ड में

श्री मिश्र ने अपनी अगली पोस्ट में लिखा कि संघ 93 वर्ष पुराना विश्वव्यापी संगठन है। इसे जानने-समझने के लिए संघ में आना पड़ेगा। इस वर्ष यह भी निर्णय लिया गया है कि गुरुपूजन कार्यक्रम में बौद्धिक के लिए कौन मुख्य अतिथि आएगा, उसका नाम कार्ड या पत्रक में नहीं छपेगा। केवल स्थान, दिनांक और समय से सम्बन्धित पत्रक छपेगा। ऐसा इसलिए ताकि गुरुपूजन को माध्यम बनाकर सिर्फ स्वार्थ सिद्धि के लिए उस विशिष्ट व्यक्ति से मिलने और फोटो खिंचवाने आने वालों से बचा जा सके।

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